Pradhanmantri Employment Generation Program : प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) के तहत शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर प्रदान करना है। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम वर्ष 2008-09 से प्रारम्भ किया गया। योजना का उद्देश्य शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में औद्योगिक व सेवा क्षेत्र की गतिविधियों को बढ़ावा देकर रोजगार के नये अवसर प्रदान करना है। राष्ट्रीय स्तर पर योजना की क्रियान्वयन एवं नोडल एजेन्सी खादी और ग्रामोद्योग आयोग, मुम्बई है। राज्य स्तर पर खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड एवं जिला उद्योग केन्द्र सह क्रियान्वयन एजेंसी है। योजना के प्रमुख प्रावधान निम्नलिखित हैं-
- 1. कोई भी व्यक्ति जिसकी आयु 18 वर्ष से अधिक हो, योजनान्तर्गत लाभ प्राप्त कर सकता है।
- 2. विनिर्माण क्षेत्र में 10 लाख और व्यवसाय/सेवा क्षेत्र में 5 लाख रुपए से अधिक लागत वाली परियोजना स्थापित करने के लिए लाभार्थी की न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता 8वीं कक्षा पास होना।
- 3. भारतीय रिजर्व बैंक के दिशा-निर्देशानुसार 10 लाख तक के प्रोजेक्ट्स पर कोलेटरल सिक्योरिटी (प्रतिभूति) का प्रावधान नहीं।
- 4. उद्योग क्षेत्र में अधिकतम् 50 लाख रूपये तथा सेवा क्षेत्र में अधिकतम् 20 लाख रुपए तक के ऋण पर मार्जिनमनी राशि देनी होगी।
- 5. योजनान्तर्गत ऋण लेने के लिए को-ऑपरेटिव सोसायटीज, चेरिटेबल ट्रस्ट, सोसायटी रजिस्ट्रेशन एक्ट 1860 में पंजीकृत संस्थान एवं स्वयं सहायता समूह भी पात्र।
6. ऋण अदायगी की अवधि 3 से 7 वर्ष। - 7. सामान्य वर्ग के पुरुषों के लिए शहरी क्षेत्र में परियोजना लागत का 15 प्रतिशत एवं ग्रामीण क्षेत्र में 25 प्रतिशत मार्जिनमनी तथा एस.सी./एस.टी./ओ.बी.सी./अल्पसंख्यक/महिला/भू.पू.सैनिक/ दिव्यांग श्रेणी से संबंधित प्रार्थी को शहरी क्षेत्र में 25 प्रतिशत एवं ग्रामीण क्षेत्र में 35 प्रतिशत मार्जिनमनी देय।
- 8. प्रति तीन लाख के स्थाई विनियोजन पर एक व्यक्ति का रोजगार का सृजन।
- 9 ऑन-लाईन आवेदन https://www.kviconline.gov.in/pmegpeportal पर किया जा सकता है।
अपात्र गतिविधियॉं :-
- 1. मांस/मीट से जुड़ा कोई उद्योग/व्यवसाय।
- 2. बीड़ी/पान/सिगार/सिगरेट आदि नषीली वस्तुओं का उत्पादन/विनिर्माण और बिक्री।
- 3. 75 माइक्रोन से कम मोटाई वाले पोलीथीन की थैलियों का विनिर्माण और खाद्य पदार्थां को ले जाने, वितरण करने भंडारण हेतु पुनः चक्रित प्लास्टिक से बने थैले या कन्टेनर और कोई ऐसा उत्पाद जो पर्यावरण को नुकसान पहुँचा सकता है।
- 4. चाय, कॉफी, रबर आदि आदि जैसी फसलों/बागानों की खेती से जुड़े कोई उद्योग/व्यापार।
- 5.राज्य सरकार व केन्द्र सरकार द्वारा प्रतिबंधित गतिविधियॉं।