Unexplored Tourist Places in jaipur : जयपुर पर्यटन की दृष्टि से विश्व मानचित्र पर अपने अलग पहचान रखताहै। यहां के किले, महल, गुलाबी शहर, खूबसूरत शहर की बनावट लोगों के दिलों में बस जातीतहै। पूराशहर गुलाबी रंग में रंगा होने के कारण इसे गुलाबी शहर भी कहा जाता है। शहर की प्रमुख जगहों पर तो सब जाते हैं, लेकिन जयपुर और इसके आसपास छिपे हुए पर्यटन स्थान भी हैं, जो पर्यटकों को दूसरी दुनिया का अहसास कराती है। आप नजारे देखने के लिए स्विटरजरलैंड जाते हैं, लेकिन जयपुर में भी स्विटरजरलैंड हैं। चक्कर में पड़ गए ना,तो जानिए विस्तार से इस खूबसूरत जगह के बारे में –
सांभर – स्विटरजरलैंड सा नजारा
जयपुर से लगभग 80 किलोमीटर दूर, अऱावली की पहाडियों से घिरा यह सुरम्य स्थल। शांत वातावरण, विदेशी पक्षियों की चहचहाट वाली इस झील में पानी और आसमान मिलते हैं, जो अद्भुत नजारा होता है, जो कहीं देखने का नहीं मिलता है। चारों तरफ स्विटरजरलैंड की बर्फ जैसी सफेद चादर बिछी नजर आती है।
राजहंस देखने का अपना मजा
पक्षियों से प्यार करने वालों के लिए तो यह जगह स्वर्ग से कम नहीं है। राजहंस (फ्लेमिंगों) की अठखेलियां स्मृति पटल पर सदैव के लिए अंकित हो जाती है। हर साल रूस, मंगोलिया और साइबेरिया से हज़ारों प्रवासी पक्षी यहाँ आते हैं। सर्दी में रूकते हैं, अपना कुनबा बढ़ाते हैं और तापमान बढ़ने के साथ ही अपने घरों को लौट जाते हैं। झील में तैरते इन पक्षियों को कैमरे में कैद करने का अपना ही आनंद होता है।
राजस्थान की सबसे बड़े खारे पानी की झील
इस स्थान का राजस्थान की सबसे बड़े खारे पानी वाली झील के नाम से भी जाना जाता है। जयपुर, अजमेर और नागौर तक फैली इस झील में नमक का उत्पादन होता है। देश में नमक की खपत सांभर के नमक से ही पूरी होती है। अंग्रेजों के जमाने से यहां नमक का उत्पादन किया जा रहा है।
शाकंभरी देवी का ऐतिहासिक मंदिर
सांभर का नाता महाभारत काल से भी है। इसे लेकर कई कहानियां चलन में है। शाकंभरी देवी का प्राचीन मंदिर है, कहते हैं मां के दरबार से कोई खाली नहीं जाता है। इसलिए पूरे साल यहां मेला सा लगा रहता है। यहां का देवयानी कुंड औऱ शर्मिष्ठा सरोवर को भी तीर्थ स्थल का दर्जा होने से लोग नहाकर स्वयं का पवित्र करने का काम करते हैं।
हर साल होता है दिसंबर में सांभर फेस्टिवल
सरकार ने इस जगह की खूबसूरती को समझते हुए हर साल यहां सांभर फेस्टिवल का आयोजन शुरू किया है। जिसमें लाखों की तादाद में पर्यटक पहुंचते हैं। राजस्थान की लोक कला, संस्कृति का मंचन होता है, वहीं एडवेंचर स्पोर्टस का लोग जमकर मजा लेते हैं।
उचित समय
अक्टूबर से मार्च के बीच का समय पक्षी-दर्शन और घूमने के लिए सबसे अच्छा माना जाता है, जब प्रवासी पक्षी यहाँ आते हैं।
कैसे जाएं?
अपने वाहन से सुबह जाकर शाम तक लौट सकते हैं। सरकारी बसों का सुबह शाम नियमित संचालन होता है।