Jaipur Ka Achar : जयपुर में खाने की चीजों का जो स्वाद है, वो उन्हें विश्व पटल तक लेकर जाता है। यहां की मिठाइयां हो या कचोरी समोसे। इनके बीच ही जयपुर का अचार भी बहुत फेमस है और अपने स्वाद व क्वालिटी के चलते कई देशों को निर्यात किया जाता है। यह अचार सिर्फ एक परिवार के मर्द मिलकर ही बनाते हैं, महिलाओं का अचार बनाने में योगदान नहीं है। करीब 200 साल पुरानी इस अचार की दुकान के कारण ही इस गली का नाम अचार वालों की गली पड़ा और सरकारी रिकार्ड में भी यही दर्ज है। विजयलाल अचार वाले की यह दुकान पिछली पांच पीढि़यों से अचार का काम ही करती है। पूरे बाजार में एक ही अचार की दुकान है, लेकिन इतनी मशहूर हो गई कि गली का नाम ही अचार वाली गली हो गया।
- कई देशों में जाता है इनका अचार
- यह दुकान चकाचौंध से भले ही दूर है, लेकिन स्वाद दुनियाभर में फेमस है। भारत के होम मिनिस्टर अमित शाह के लिए भी इनके यहां से स्पेशल बिना मिर्ची का अचार बन कर जाता है। जयपुर के बड़े-बड़े ऑफिसर, आईएएस और मिनिस्टर भी यहीं का अचार पसंद करते हैं।कई मंदिरों के छप्पन भोग में भी यहां बने अचार शामिल किए जाते हैं। VIP दीवाने
- 3000 वर्ष पहले हुई थी अचार की खोज
इस गली के आसपास से निकलने पर ही अलग अलग तरह के अचार की सुगंध अपनी ओर खींच लेती है। दादा, परदादा के फार्मूले के तहत बनाए जा रहे अचार में देसी मसालों का ही उपयोग किया जाता है। अंग्रेजों के जमाने से चली आ रही इस दुकान में करीब 75 किस्म के अचार मिलते हैं, जो अपने आप में अनूठा है। इनकी गुलकंद और मुरब्बा भी अचार की तरह मशहूर है।
दुकान के मालिक अतुल अग्रवाल कहते हैं कि यह दुकान उनके पूर्वजों ने शुरू की थी। वे पांचवीं पीढ़ी से हैं। उनके दादाजी विजयलाल ने इस काम को काफी फेमस किया। वे जितनी वैरायटी का अचार बनाते थे, आस-पास कहीं भी इतने फ्लेवर नहीं मिलते थे। ऐसे-ऐसे अचार बनाए, जिनके लोगों ने नाम तक नहीं सुने होते थे। वे अचार में किसी तरह का केमिकल जैसे- सिरका का इस्तेमाल नहीं करते। सारे मसाले बाजार से कच्चे खरीदकर उन्हें घर पर ही तैयार करते हैं। अचार में पड़ने वाली कलौंजी, सौंफ, साबुत धनिया, मेथी दाना, पीली सरसों, काली मिर्च, लाल मिर्च पाउडर से लेकर सौंठ जैसे मसाले घर पर ही पीसकर इनका मिक्सचर तैयार किया जाता है। अभी भी उनके यहां अचार सैकड़ों वर्ष पुरानी बड़ी कढ़ाही और बर्तनों में तैयार किया जाता है।
अचार बनाने का तरीका इतने सालों से वही है, जैसा दादा-परदादा बनाया करते थे। इनकी लोकप्रियता का सबसे बड़ा कारण इनकी शुद्धता है, जो इतने सालों से बरकरार है।अचार बनाने का सीक्रेट तरीका भी सिर्फ घरवालों के पास ही है। अचार बनाने में सामग्री का बड़ा रोल होता है। कौन सा मसाला, कितनी मात्रा में कौन से अचार में डालना है, इसका एक तय फॉर्मूला होता है। फिर अच्छी वैरायटी के सरसों के तेल से इसकी जो महक बनती है, वो स्वाद को दोगुना कर देती है। ये सारा तरीका उन्होंने अपने बड़े बुजुर्गों से सीखा है। बस मसालों को नाप तोल कर समय पर डालने से ही अचार का सही स्वाद बनता है।
कई देशों में जाता है इनका अचार
यह दुकान चकाचौंध से भले ही दूर है, लेकिन स्वाद दुनियाभर में फेमस है। भारत के होम मिनिस्टर अमित शाह के लिए भी इनके यहां से स्पेशल बिना मिर्ची का अचार बन कर जाता है। जयपुर के बड़े-बड़े ऑफिसर, आईएएस और मिनिस्टर भी यहीं का अचार पसंद करते हैं।कई मंदिरों के छप्पन भोग में भी यहां बने अचार शामिल किए जाते हैं।
VIP दीवाने
बॉर्डर फिल्म के डायरेक्टर जेपी दत्ता की पूरी फैमिली के लिए यहां से आचार जाता है। जयपुर से एजेंट मुंबई के कई बॉलीवुड कलाकारों के लिए अचार लेकर जाते हैं। फिल्म स्टार सनी देओल से लेकर सुनील शेट्टी तक इस स्वाद के दीवाने हैं।
3000 वर्ष पहले हुई थी अचार की खोज
- इतिहासकारों के अनुसार, अचार की खोज आज से 3000 साल पहले टिगरिस घाटी में हुई थी। यहां के लोग भारत से आए खीरे का अचार बनाकर खाते थे।
- 2400 B.C में मोहनजोदड़ो सभ्यता में भी अचार बनाया जाता था। यहां के मूल निवासी खाने को प्रिजर्व करने के लिए उसे नमक या तेल में डुबोकर रखते थे।
- समय के साथ-साथ अचार लंबे दिनों तक खाने को संरक्षित रखने और आसानी से कहीं भी ले जा सकने वाले गुणों के कारण दुनिया भर में प्रसिद्ध हो गया।