Jagadguru Rambhadracharya: श्रीराम जन्म भूमि पर अदालत के फैसले से पहले मंदिर निर्माण के बारे में सटीक भविष्यवाणी करने वाले जगद्गुरु रामभद्राचार्य जयपुर में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को जहां अभयदान दे गए, वहीं सनातन को लेकर किसी तरह का बर्दाश्त नहीं करने का भी ऐलान कर दिया। लव जिहाद हो या पाक अधिकृत कश्मीर के मुद्दों पर बेबाकी से अपनी बात कही। वही ंकाशी और मथुरा की कृष्ण जन्मभूमि हिन्दुओं का मिलने का ऐलान किया। साथ ही सनातनियों से आह्वान किया कि ओम शांति शांति बहुत हुआ, अब ओम क्रांति क्रांति का दौर आ गया। जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को कहा – लंबे समय बाद राजस्थान को एक ब्राह्मण बालक मुख्यमंत्री मिला है। उनका राजनीतिक क्षितिज लंबे समय तक जगमगाएगा। आपका राजनीतिक क्षितिज बहुत प्यारा है। सबको सब कहने दीजिए, आप मस्ती में काम कीजिए। इस सूक्त को ध्यान में रखिए – हाथी चले बाजार, कुत्ते भौंके हजार। आपका मंगल होगा।
जयपुर में अपने 77वें जन्मदिन के अवसर पर कहा लव जिहाद से हमारी बहनों की रक्षा नहीं हो जाती, तब तक विश्राम नहीं करूंगा रामभद्राचार्य ने कहा- 76 साल मुझे हो गए हैं। 100 साल में 24 साल और बचे हैं, लेकिन काम बहुत करना है। अभी 25 साल मुझे और चाहिए। मुझे जिजीविषा है। मैं कुछ नहीं जानता, जब तक पाक अधिकृत कश्मीर हमको नहीं मिल जाता। जब तक प्रत्येक हिन्दू अपने अपमान का बदला लेने में सक्षम नहीं हो जाता। जब तक लव जिहाद की काल कूप से हमारी बहनों की रक्षा नहीं हो जाती, तब तक हम विश्राम नहीं लेंगे। आप सबको भी यही करना है। अब ओम शांति-शांति नहीं, ओम क्रांति-क्रांति का समय रामभद्राचार्य ने कहा- मैं फिर कहने जा रहा हूं, ओम शांति-शांति तो बहुत सुन लिया। मेरा जन्म मकर संक्रांति को हुआ है। मेरा मन है कि अब ओम शांति-शांति वृद्धों का नारा हो गया है। अब हमें ओम क्रांति-क्रांति करना है। हम करेंगे।
हिंदू अपने अपमान का बदला लेना जानता है
रामभद्राचार्य ने कहा- हिंदुओं के लिए ये शताब्दी वरदान सिद्ध होगी। इक्कीसवीं शताब्दी हिंदुओं की है। हमें साध्वी जैसी बहनों का अगर सहयोग रहा, तो जिस तरीके से भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा में आगे-आगे सुभद्रा चलती है, फिर जगन्नाथ। मुझे लगता है हिंदुओं की विजय रथ यात्रा में पहले साध्वी ऋतम्भरा चलेगी, फिर मैं। और एक बार फिर हम लोगों को दिखा सकेंगे कि हिन्दू अपने अपमान का बदला लेना जानता है।
भूलकर भी न किसी को छेड़ेंगे हम, और छेड़ने पर किसी को न छोड़ेंगे हम
रामभद्राचार्य ने कहा- विगत 26 दिसंबर को एक ऐसी घटना हुई। एक हजार साल पहले महमूद गजनवी ने सोमनाथ मंदिर तोड़ा था। उसका जीर्णोद्धार हुआ, फिर टूटा, हमने बनाया। हम आप सबका आवाहन करते हैं कि अब कोई संकोच नहीं होगा। जहां-जहां हमारे मंदिर होंगे, वहां-वहां हम अपने अधिकार को स्वीकार करेंगे। कुछ भी हो जाए, अब हिन्दू किसी से नहीं डरेगा। भूलकर भी न किसी को छेड़ेंगे हम, और छेड़ने पर किसी को न छोड़ेंगे हम।