BMC Election Results 2026 : महाराष्ट्र में 29 बड़े नगर निकायों के परिणाम ने साफ कर दिया कि मराठी और गैर मराठी के नारे के दम पर महाराष्ट्र में भय-खौफ का माहौल बनाकर चुनाव जीतने वाले उद्द्व ठाकरे और राज ठाकरे का अब सफाया हो गया। गैर मराठियों ने इन्हें निपटाकर साफ कर दिया कि उन्हें अब उनका डर नहीं लगता है। अब दौर गया। चुनाव में राष्ट्र प्रथम और सबका विकास का नारा देने वाली भाजपा के हवाले अब एक तरह से पूरा महाराष्ट्र कर दिया। मुंबई नगर निगम से उद्दव की शिव सेना की 25 साल बाद विदाई हो गई।
पूरे महाराष्ट्र में इसी निगम में करीब 66 सीटें इस गुट को मिली है, इसके अलावा कहीं चेहरा दिखाने लायक परिणाम भी नहीं आया। शिव सेना से टूटकर अपना वजूद बनाने वाले एकनाथ शिंदे भी ठाणे तक सिमट कर रह गए। ठाणे से सटे वसई,विरार, मीरा, भायंदर, कल्याण आदि में शिंदे की पार्टी को कोई सफलता बड़ी नहीं मिली, जो बताती है कि शिंदे को वजूद सिर्फ ठाणे तक रह गया।
पश्चिमी महाराष्ट्र में शरद पंवार की पार्टी एनसीपी का गढ़ हुआ करता था, वो भी ढह गया। एनसीपी से टूटकर अलग गुट बनाने वाले अजित पवार को जबरदस्त नुकसान हुआ है। 29 नगर निकायोंं में से एक में भी कब्जा नहीं कर सके। कांग्रेस को लातूर समेत कुछ छोटे निकायों पर जीत हासिल हुई है, लेकिन संभाजी नगर और मालेगांव में ओवेसी की पार्टी को बड़ी सफलता मिली है। मुसलमानों ने कांग्रेस का साथ छोड़कर ओवेसी का साथ देने का फैसला किया।
पूरे महाराष्ट्र के परिणाम पर निगाहें डालें तो साफ है कि ठाकरे मुंबई, शिंदें ठाणे, कांग्रेस लातूर तक सिमट कर रह गई, जबकि भाजपा 25 निकायों में कब्जा करके महाराष्ट्र की इकलौती सबसे बड़ी पार्टी हो गई। भाजपा को लोकसभा चुनाव में भले ही वोट ज्यादा मिले थे, लेकिन सीटें कांग्रेस से कम मिली थी। भाजपा ने अपनी कमियों को विधानसभा में पूरी तरह दूर करके महाराष्ट्र में सरकार बनाने में सफलता हासिल कर ली थी। अब निकाय चुनाव के बाद तो बिल्कुल साफ हो गया कि लोगों का भाजपा में विश्वास है, अब वे स्थानीय दलों पर भरोसा नहीं कर रहे।
2019 के महाराष्ट्र विधानसभा में सबसे ज्यादा सीटें जीतने के बाद भी भाजपा की सरकार नहीं बन पाई थी। उद्द्व की शिव सेना ने मुख्यमंत्री अपनी पार्टी का बनाने की शर्त पर भाजपा से गठबंधन तोड़कर कांग्रेस से साथ मिला लिया था। खुद को कट्टर हिन्दू पार्टी कहने वाली शिवसेना के इस फैसले से उसके समर्थकों में खासी नाराजगी थी, जिसका बदला उन्होंने 2024 विधानसभा चुनाव में परिणाम बदलकर दिया। उद्द्व तब तक भी महाराष्ट्र की नब्ज नहीं पकड़ सके और कांग्रेस का साथ छोड़ने को तैयार नहीं हुए। बाला साहेब ठाकरे कभी शिव सेना के साथ जाने की बात नहीं कहते थे, वे साफ कहते थे कि कभी ऐसा दिन भी आया तो पार्टी को खत्म करना बेहतर होगा। बाला साहेब का महाराष्ट्र की जनता दिल से प्यार औऱ सम्मान करती थी, लेकिन उनके पुत्र उद्दव ठाकरे ने जिस तरह से उनका अनादर किया, उसे महाराष्ट्र की जनता कभी भूल नहीं सकती है।
2019 में जिस तरह से उद्दव ठाकरे ने साथ छोड़ा, तभी भाजपा ने शिव सेना को तोड़कर पूरी तरह समाप्त करने का प्लान बनाकर काम शुरू कर दिया था। शिव सेना के दूसरे बड़े नेता एकनाथ शिंदे को अलग ही नहीं करवाया , बल्कि असली शिव सेना होने और चुनाव चिह्न पर भी कब्जा करवा दिया। यहीं से उद्दव का पतन शुरू हो गया। तब तक भी उद्दव भाजपा के प्लान को भांप नहीं सके। इतना ही नहीं भाजपा ने शिंदे को ठाणे तक सिमटा रखने पर काम किया, उस पर भी सफल हो गया। इसके बाद शरद पवार की पार्टी एनसीपी को तोड़ने और उनके भतीजे अजित पवार को अलग करने का प्लान बनाया और बड़ी आसानी से उसमें कामयाब हो गए। पश्चिमी महाराष्ट्र से पूरी तरह सफाया कर दिया।
भाजपा किसी राज्य में चुनाव खत्म होने के साथ ही अगले चुनाव की रणनीति पर काम शुरू कर देती है, जबकि दूसरी पार्टियां चुनाव के समय ही जागती है। बहरहाल वो दिन दूर नहीं जब पूरे देश के समस्त राज्यों पर भाजपा राज करेगी।
-डा. उरुक्रम शर्मा