Jaipur Ka Pravesh Dwar : जयपुर शहर में दक्षिण दिशा से प्रवेश के लिए वैसे तो तीन दरवाजे हैं। अजमेरी गेट (Ajmeri Gate), न्यू गेट (New Gate)और सांगानेरी गेट (Sanganeri Gate)। इनमें से सांगानेरी गेट का अपना महत्व है। इसकी खूबसूरती और सदियों से यह अटल ही नहीं बल्कि खुशहाली का प्रतीक है। तीन दरवाजों वाले सांगानेरी गेट के मध्य वाले दरवाजे के ऊपर गणपित बिराजमान हैं, जो शहर के सारे विघ्न हरते हैं। इस दरवाजे मेंसे प्रवेश करते हुए दो पूर्व मुखी और पश्चिम मुखी हनुमानजी के मंदिर हैं, जो शहर को हर संकट से सदा दूर रखते हैं। इस दरवाजे से होकर शहर में प्रवेश करके जौहरी बाजार होते हुए बड़ी चौपड़, हवा महल, जलमहल से सीधे आमेर तक जाने का रास्ता है। इसका निर्माण सवाई जयसिंह-2 ने 18वीं सदी में करवाया था। यह बाजार अपनी पारंपरिक राजपूत-मुगल वास्तुकला और जीवंत बाजार की संस्कृति के लिए जाना जाता है। पहले इस दरवाजे को शिवपाल कहा जाता था।
जयपुर के सांगानेरी गेट की खासियत
(Sanganeri Gate Jaipur Specialities)
- 1. यह जयपुर के पुराने शहर के दक्षिणी हिस्से में है, जो जौहरी बाजार के सामने है।
- 2. इसका निर्माण 18वीं सदी में महाराजा सवाई जय सिंह द्वितीय के शासनकाल में हुआ था और यह पिंक सिटी के मुख्य प्रवेश द्वारों में से एक था।
- 3. यह राजपूत और मुगल शैलियों का मिश्रण है, जिसमें मेहराब, जटिल नक्काशी और झरोखे (ओवरहैंगिंग खिड़कियां) हैं।
- 4. इसे शिवपोल (शिव पोल) भी कहते हैं क्योंकि इसके पास एक ऐतिहासिक शिव मंदिर है, जहाँ राजपरिवार महाशिवरात्रि पर दर्शन करने आते थे।
- 5. यह द्वार जयपुर के प्रसिद्ध बाजारों जैसे जौहरी बाजार और बापू बाजार तक पहुँच प्रदान करता है, जो वस्त्र, आभूषण और हस्तशिल्प के लिए प्रसिद्ध हैं।
- 6. यह पर्यटकों और इतिहास प्रेमियों के लिए एक लोकप्रिय स्थान है, जो जयपुर के शाही अतीत और जीवंत संस्कृति की झलक देता है।