बांसवाड़ा-डूंगरपुर के सांसद और भारत आदिवासी पार्टी के नेता Rajkumar Roat ने राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा सेकेंड ग्रेड टीचर भर्ती-2022 के पेपर लीक मामले में गिरफ्तार किए गए राजस्थान लोक सेवा आयोग (आरपीएससी) के पूर्व सदस्य बाबूलाल कटारा पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि इसमें लिप्त दूसरे लोगों पर कब कार्रवाई होगी। उन्होंने कांग्रेस के कई बड़े नेताओं के लिप्त होने का न केवल सीधा आरोप लगााय, बल्कि सिफारिश करने के लिए जिम्मेदार बताते हुए उनके नामों का भी खुलासा किया। आरोप लगाते ङुए पूछा कि कटारा के कंधे पर बंदूक रख कर नौकरियां बेचने वाले नेताओं पर कार्रवाई कब होगी?
कटारा को अकेले बलि का बकरा बनाया जा रहा
उन्होंने उदयपुर देहात कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रघुवीर सिंह मीणा, डूंगरपुर के पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष दिनेश खोड़निया और पूर्व मंत्री अर्जुन बामनिया जैसे कांग्रेस नेताओं के नाम लिए। रोत का आरोप है कि ये वही नेता हैं जिन्होंने कांकरी डूंगरी प्रकरण को अंजाम दिया, और अब कटारा को अकेले बलि का बकरा बनाया जा रहा है। कटारा को लगाने के पीछे कौन लोग थे ये तो देखना होगा। पेपर लीक से संबंध वाले राजनीतिक लोगों ने कन्नी काटी। मालवीया कहां जाए इससे हमारा कोई लेना देना नहीं।
उन्होंने महेंद्रजीत सिंह मालवीया का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस में रहते हुए उन पर कई आरोप लगे, फिर भाजपा की ‘वॉशिंग मशीन’ में धुलकर साफ हो गए, और अब वापस कांग्रेस में लौट आए हैं। रोत ने कहा कि मालवीया कहां जाए इससे हमारा कोई लेना देना नहीं लेकिन सवाल तो बनता है। रोत ने कहा कि कटारा को सदस्य बनने का अवसर मिला यह आदिवासी इलाके के लिए गर्व की बात थी लेकिन जैसे ही गिरफ्तारी हुई तब माहौल बनाया कि आदिवासी अधिकारी ने भ्रष्टाचार किया। इसके बाद जिन राजनीतिक लोगों का पेपर लीक से संबंध था उन्होंने उनसे कन्नी काट ली।
कांकरी डूंगरी प्रकरण का इनाम दिया था कटारा को
मेरा कहना है कि बाबूलाल कटारा को कांग्रेस की सरकार में आरपीएससी सदस्य बनाया था यह सामाजिक फैसला नहीं था। ये एक राजनीतिक फैसला था। स्वार्थी राजनेताओं का फैसला था। सबको पता है कि डूंगरपुर-खेरवाड़ा में साल 2020 में कांकरी डूंगरी प्रकरण हुआ। जिसको भूल नहीं सकते हैं ये भविष्य में भी हर कड़ी से जुड़ेगा।
मतलब साफ है कि कांकरी डूंगरी प्रकरण को शांत कराने के लिए इन नेताओं ने बाबूलाल कटारा के नाम पर सिफारिश की थी। तत्कालीन अशोक गहलोत को जो ब्रीफ नोट दिया उसमें कहा कांकरी डूंगरी प्रकरण शांत कराने में बाबूलाल कटारा का बड़ा रोल रहा है तब कांग्रेस ने उनको RPSC का सदस्य बनाकर इनाम दिया था।
सिफारिशी नेता अपनी छवि सुधारने में लगे
सांसद रोत ने कहा कि बाबूलाल कटारा के नाम की अनुशंसा करने वाले जो नेता थे उन्होंने ही कांकरी डूंगरी प्रकरण कराया था। जो नेता इसमें शामिल थे वे किनारे हो रहे हैं। अपनी छवि सुधारने में लगे है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार जीरो टॉलरेंस की बात करती है लेकिन क्या ये डबल इंजन की सरकार ये बताएगी कि इस मामले में कौन-कौन नेता शामिल थे, ये उन पर कार्रवाई क्यों नहीं कर रहे हैं। क्या इसमें आरपीएससी आयोग के चेयरमैन से लेकर दूसरे सदस्य शामिल नहीं थे। सीएम भजनलाल खुलासा नहीं करते हैं तो इन पर भी सवाल उठेंगे।
ठीकरा कटारा पर फोड़ा और बाकी नेता बच गए
उन्होंने कहा कि पेपर लीक का गिरोह लंबे समय से सक्रिय है और अब सारा दोष कटारा पर फोड़ दिया गया, जबकि असली नेता बच निकले। रोत ने मांग की कि शामिल नेताओं के नाम सामने आएं और उन पर सख्त कार्रवाई हो। मालवीया पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि भाजपा छोड़ कांग्रेस में लौटने के बाद क्या अब उन पर कार्रवाई होगी? कटारा ने ईडी को दिए बयान में खुद को जान का खतरा बताया है, इसकी गहन जांच होनी चाहिए।