Opinion on Indore Water Crisis : इंदौर (मध्यप्रदेश) का भागीरथपुरा इलाका…दूषित पेयजल की चपेट में आने से 15 लोगो का हत्यारा बना. 16 बच्चों समेत 201 लोग दूषित पेयजल के कारण अभी अस्पताल में। नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय सत्ता के मद में चूर हैं। जिनके घरों के चिराग बुझे उन्हें दो दो लाख रुपए मुआवजा देकर सरकार चुप कराने में पूरी ताकत से लग गई है। जनता खुद्दार है। सरकारी चैक लेने से मना कर दिया। दो टूक कहा, जिसकी हत्या पानी और नकारा प्रशासन ने कर दी, क्या दो लाख उसे वापस लाकर दे देगा। दो साल से लोग दूषित पेयजल की पार्षद से शिकायतें कर रहे थे, लेकिन किसी के जूं तक नहीं रेंगी। परिणाम 15 लोगों की सीधे तौर पर नकारे प्रशासन की वजह से हो गई। अब इंदौर के सांसद नए बोरिंग लगाने की बात कर रहे हैं, जब लोग अपनी पीडा लेकर आते थे, तब क्या सांसद और नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय को सांप सूंघ गया था।
सीधे मुंह जनता से बात नहीं करने वाले विजयवर्गीय अब दिखावे के लिए झूठी तसल्ली देने लोगों के बीच जा रहेहैं। जहां महिलाओं की नाराजगी का उन्हें सामना करना पड़ रहा है। ये पूरी तरह से प्रशासन की लापरवाही का मामला है, जिसने 15 लोगों का अब तक हमेशा मौत की नींद सुला दिया। सरकार को चाहिए कि जिम्मेदार चाहे मंत्री हो, विधायक हो, पार्षद हो, या फिर स्थानीय प्रशासन सबके खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज होना चाहिए, ताकि इन्हें तो सबक मिले ही बल्कि दूसरे नेताओं और अफसरों को भी पता चल सके कि जनता के मुद्दों पर लापरवाही की सजा क्या होती है।
मौतें होने पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने मध्यप्रदेश के मुख्य सचिव से दो हफ्ते में विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। जनता को ना तो सरकार पर भरोसा है ना ही सरकार के कारिंदों पर। इस प्रकरण में जब तक हाईकोर्ट अपने स्तर पर संज्ञान लेकर लापरवाही के जिम्मेदारों की जिम्मेदारी तय नहीं करेगा, तब तक इनकी समझ में नहीं आ सकता है। सत्ता के लिए किसी की मौत महज आम है। जिसकी क्षतिपुर्ति पैसे देकर सरकार करने की कोशिस करती है ।
— डा. उरुक्रम शर्मा