Jodhpur High Court News: कोर्ट के आदेश के बाद अब सभी राष्ट्रीय राजमार्गों (नेशनल हाइवे) के धार्मिक स्थल जैसे मंदिर, मस्जिद, दरगाह, मजार आदि को हटाया जाएगा। साथ ही जितने भी व्यावसायिक और आवासीय निर्माण परिधि सीमा में आ रहे हैं, उन्हें भी हटाया जाएगा। सरकार को 12 अप्रैल तक इन्हें हटाना होगा, क्योंकि इन्हें हटाने के लिए जोधपुर हाईकोर्ट ने दो महीने का समय निर्धारित किया है। हाईकोटर् के अनुसार नेशनल हाइवे पर राइट आफ वे से दोनों तरफ 40-40 मीटर में बने निर्माण तोड़े जाएंगे। साथ ही राइट आफ वे से 75–75 मीटर तक भी कोई गतिविधि मान्य नहीं होगी। नेशनल हाइवे पर राइट आफ वे में अतिक्रमणों की संख्या फिलहाल 2216 सामने आई है।
हाईकोर्ट ने साफ किया है कि इस परिधि में यदि किसी तरह की किसी भी सरकारी विभाग ने परमिशन दी है, तो वो रद्द की जाएगी। भविष्य में नेशनल हाइवे आथोरिटी से एनओसी बिना किसी भी तरह की कोई विभाग स्वीकृति नेशनल हाइवे के मामले में जारी नहीं कर सकेगा।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सड़कों पर सुरक्षित आवाजाही संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत मौलिक अधिकार है। इसमें किसी भी प्रकार का अवरोध ‘संवैधानिक गलती’ है। प्रदेश में हाईवे पर 103 मंदिर, मस्जिद आदि धार्मिक संरचनाएं हैं। जस्टिस डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस संदीप शाह की खंडपीठ ने ‘हिम्मत सिंह गहलोत बनाम राजस्थान राज्य’ जनहित याचिका में यह रिपोर्टेबल जजमेंट दिया है। मामले की अगली सुनवाई 10 मार्च को होगी। यह मामला जोधपुर के चौखा सुलिया बेरा निवासी हिम्मत सिंह गहलोत की ओर से दायर जनहित याचिका से शुरू हुआ। कोर्ट ने अपने आदेश में 22 जनवरी 2026 की एक दुखद घटना का जिक्र किया। इसमें एक धर्मकांटे (वेब्रिज) के पास अवैध कट और अतिक्रमण के कारण हुई दुर्घटना में चार लोगों की जान चली गई थी। कोर्ट ने माना कि यह हादसा केवल एक संयोग नहीं, बल्कि हाईवे सुरक्षा मानकों के खुले उल्लंघन का प्रत्यक्ष परिणाम था।
हाईवे की केंद्र रेखा से दोनों ओर दूरियां इस प्रकार निर्धारित हैं-
रोड लैंड बाउंड्री/बिल्डिंग लाइन- मध्य रेखा से दोनों ओर लगभग 40 मीटर (कुल चौड़ाई 80 मीटर)। इस क्षेत्र में कोई निर्माण अनुमति योग्य नहीं है।
कंट्रोल लाइन- मध्य रेखा से दोनों ओर लगभग 75 मीटर (कुल चौड़ाई 150 मीटर)। यहां केवल विशेष वैधानिक अनुमति से ही विनियमित निर्माण संभव है।
राइट ऑफ वे (ROW): यह वह परिचालन गलियारा है, जिसमें कैरीज-वे, ड्रेन और सुरक्षा मार्जिन शामिल होते हैं। कोर्ट ने आदेश दिया कि राइट ऑफ-वे के भीतर का हर अतिक्रमण अवैध है और उसे हटाना अनिवार्य है।
खतरनाक दृश्य जो आंखें खोलता है
कोर्ट ने सड़क परिवहन मंत्रालय की वर्ष 2023 की रिपोर्ट का संज्ञान लिया। इसके अनुसार देश में 1.72 लाख से अधिक मौतें सड़क हादसों में हुईं। चौंकाने वाली बात यह है कि नेशनल हाईवे कुल सड़कों का मात्र 2% है, लेकिन 30% मौतें इन्हीं पर होती हैं। कोर्ट ने कहा कि यह आर्थिक उत्पादकता वाले 18-45 आयु वर्ग का नुकसान है, जो देश की जीडीपी पर 3% का बोझ डालता है।
अतिक्रमण हुआ तो अफसर की जिम्मेदारी
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि दो महीने के भीतर जीआईएस मैपिंग और फोटोग्राफिक सबूतों के साथ जिलेवार स्टेटस रिपोर्ट पेश की जाए। अधिकारियों को आगाह किया गया है कि यदि दोबारा अतिक्रमण हुआ तो उनकी व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय होगी।