Rajasthan High Court News : राजस्थान हाई कोर्ट की खंडपीठ ने प्रदेश के जर्जर सरकारी स्कूल भवनों को लेकर अफसरों की जमकर क्लास लगाई। जर्जर स्कूलों में के उपयोग पर पाबंदी के बावजूद उपयोग करने सहित क्लास रूम व टायलेट्स के हालात पर नाराजगी जताई है। खंडपीठ ने कहा कि राजनेता केवल ट्रांसफर पर ध्यान देते हैं. रात भर में सड़क तैयार हो जाती है, लेकिन स्कूलों में बच्चों के लिए किसी तरह की व्यवस्था नहीं है। जनवरी जैसी सर्दी में भी बच्चे पेड के नीचे पढ़ रहे हैं। खंडपीठ ने मौखिक टिप्पणी करते हुए शिक्षा सचिव कृष्ण कुणाल से कहा कि आप स्वच्छ भारत मिशन की बात करते हो, लेकिन स्कूल में बच्चियों के लिए टॉयलेट नहीं बनवा पा रहे हैं। अफसरों को शर्म आनी चाहिए कि बच्चियां इसलिए पानी नहीं पी पाती, क्योंकि स्कूल में टॉयलेट्स नहीं हैं और वे वहां जा नहीं सकतीं। ऐसे में अदालत बच्चों व समाज को जवाब नहीं दे पा रही है।
जस्टिस महेन्द्र गोयल व अशोक कुमार जैन की खंडपीठ ने झालावाड़ में जर्जर स्कूल भवन मामले में लिए स्वप्रेरित प्रसंज्ञान मामले में शिक्षा सचिव कृष्ण कुणाल को सीएस व वित्त सचिव से मिलकर फंड की व्यवस्था करवाने के निर्देश दिए हैं। शिक्षा सचिव ने कहा कि सभी सरकारी स्कूलों के जर्जर भवनों की मरम्मत व नई बिल्डिंग के निर्माण के लिए 20,000 करोड़ रु. की जरूरत है। केंद्र सरकार बजट नहीं दे रही है। राज्य सरकार सीएसआर से बजट जुटा रही है। एमपी-एमएलए फंड से भी 20% राशि स्कूलों में देने का आदेश दिया है। इस पर खंडपीठ ने कहा कि उद्योगपतियों व निजी लोगों से भी फंड ले सकते हैं, वे देने को तैयार हैं, लेकिन राशि उसी उद्देश्य पर खर्च हो। अगली सुनवाई 16 को होगी।
पेड़ के नीचे पढ़ा रहे हैं
सुनवाई के दौरान शिक्षा सचिव के साथ निदेशक सीताराम जाट भी मौजूद रहे। शिक्षा सचिव ने कहा कि हम इस मुद्दे पर चिंतित हैं। फिलहाल हम पेड़ों के नीचे और निजी भवनों में बच्चों की पढ़ाई की वैकल्पिक व्यवस्था कर रहे हैं।
अब पेड़ भी गवाही देते हैं, समझे
खंडपीठ ने कहा- आप सात महीने से क्या चिंता कर रहे हैं, दिख रहा है। सितंबर से यही जवाब देते आ रहे हैं। कई जगह तो पेड़ ही नहीं हैं, वहां क्या व्यवस्था की। आज समय पहले जैसा नहीं रहा है। मौजूदा स्थितियां जानने के लिए आधुनिक तकनीकें आ गई हैं। आजकल तो पेड़ भी गवाही देते हैं। साथ ही नाराजगी जताते हुए कहा- पहले आपने यह शपथ पत्र दिया था कि बच्चों को जर्जर भवन की बजाय किसी दूसरी जगह पढ़ा रहे हैं। गलत शपथ पत्र देने पर क्यों न आपके खिलाफ अवमानना का नोटिस जारी कर दिया जाए।