भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री Vasundhara Raje पिछले कुछ समय से प्रत्यक्ष तौर पर तो नहीं लेकिन इशारों के जरिए उनके साथ जो हुआ, उसका दर्द बयां करने में कसर नहीं छोड़ रही। साथ ही जिसने जैसा किया, उसके साथ वैसा होने की नसीहत भी दे रहीहै। हाल ही उन्होंने दो टूक कहाकि किसी भी जीव, प्राणी के जीवन को नुकसान पहुंचाना हिंसा मानी गई है। राजे ने कहा कि किसी को हथियार से मारना या मारा पीटी करना ही हिंसा नहीं है। किसी को दुख दुखाना और दिल तोड़ना भी हिंसा है। राजनीति में अक्सर ऐसा होता है। राजनीति में दिल तोड़े भी जाते हैं और दिल दुखाए भी जाते हैं।
वसुंधरा राजे ने कहा- राजमाता विजया राजे सिंधिया ने सिखाया है कि जीवन में किसी का मन आहत मत करो। मैं उन्हीं की राह पर चल रही हूं। किसी के साथ अन्याय करना और किसी का हक छीनना भी अधर्म है। भागदौड़ भरी जिंदगी में लोगों के पास समय का अभाव है। यदि लोग समय निकाल कर भगवान का स्मरण कर लें तो जीवन में कठिनाइयां आए ही नहीं। इस अवसर पर युगप्रधान आचार्य महाश्रमण ने कहा कि नैतिकता,सद्भावना और नशामुक्ति व्यक्ति के जीवन में होना चाहिए। पूर्व सीएम वसुंधरा राजे संस्कारवान जननेता हैं, जो संतों के सामने आसन पर नहीं बैठती। कुर्सी का उपयोग नहीं करती हैं।
वसुंधरा राजे के बयानों के सियासी मायने पूर्व सीएम वसुंधरा राजे के बयानों के सियासी मायने हैं। राजनीति में जिस तरह से उनकी उपेक्षा का दौर शुरू हुआ, जिस तरह से कुछ राजनेताओं ने दिल्ली दरबार के साथ मिलकर उनकी राजनीतिक हत्या करने की कोशिश की, उससे वे आहत हैं। हालांकि आज भी भाजपा के पास राजस्थान में उनसे बड़ा कोई नेता नहीं है। जब भी वे राजस्थान दौरे पर जाती हैं, तो उनसे मिलने के लिए सैलाब उमड़ जाता है। उनकी लोकप्रियता से भाजपा नेताओं को सदा अपने अस्तित्व का खतरा नजर आता है।