Hanuman Beniwal राजस्थान की राजनीति में फिर अपनी धाक जमाने के लिए पूरी ताकत से जुट गए हैं। राज्य की भाजपा सरकार को उनके आंदोलन के आगे घुटने टेकने पड़ रहे हैं। राजस्थान में उनके समर्थकों में भारी इजाफा हो रहा है जो उनकी एक आवाज पर मरने मारने के लिए तैयार है। हाल ही बेनीवाल ने नागौर में जिस तरह से आंदोलन की हुंकार भरी, सत्ता और शासन दोनों की धरती सरक गई। प्रशासन ने उनके आंदोलन को कुचलने के लिए पूरी प्लानिंग बना ली थी, लेकिन दो हजार गाड़ियों में सवार समर्थकों को देखकर प्रशासन के हाथ पांव फूल गए।
जयपुर में सत्ता के गलियारों तक अफसरों के फोन घनघना उठे। जयपुर में विशेष रूप से आंदोलनन से निपटने कीतैयारी कर ली। साफ निर्देश दिए कि आंदोलनकारी जयपुर मे ंना आ पाए। नागौर कलेक्टर, अजमेर आईजी, एसपी ने जगह जगह बेरिकेडिंग करवा दी, लेकिन उसे धत्ता बताते हुए काफिला नागौर के अंतिम गांव से पहले ही जयपुर की ओऱ मुड गया। शासन की सारी व्यवस्था धरी रह गई। दो हजार से ज्यादा गाड़ियों में सवार हजारों आंदोलनकारी आगे बढ़ने लगे। तभी कलेक्टर औऱ आईजी ने बेनीवाल से वार्ता टोल नाके से पहले एक होटल में शुरू की।
बेनीवाल की दो टूक थी, मांगें मानने का लिखित एग्रीमेंट होने पर ही आंदोलन स्थगित किया जाएगा। पूरी रात जयपुर से शासन की बातचीत चलती रही । सुबह 5 बंजे सरकार झुकी और लिखित आश्वासन दिया । बेनीवाल सरकार के सारी मांगे मानने से खुश नजर आए और सुबह 6 बजे आंदोलनकारियों को सरकार के साथ हुए फैसले की जानकारी दी।
बेनीवाल का साफ कहना था कि खनन माफियाओं और अवैध बजरी खनने वालों पर तुरंत प्रभाव से कार्रवाई शुरू की जाए, जिसे प्रशासन ने मांग लिया । अगले दिन से इस पर एक्शन लेने का विश्वास दिलाया। गोचर भूमि को खुर्दबुर्द करने वाले एसडीएम के खिलाफ सख्त एक्शन, पुष्कर मेडता रास लाइन के तहत किसानों को मुआवजे का विशेष पैकेज देने, अतिवृष्टि से हुए नुकसान का मुआवजा देने संबंधित 15 सूत्री मांग पत्र को सरकार ने बिना किसी शर्त स्वीकार कर लिया। सरकार ने झुककर मामले का पटाक्षेप कर दिया, वरना इस बार हनुमान बेनीवाल की सेना राजधानी को ठप करने की तैयारी कर चुकी थी। प्रशासन को इसकी पुख्ता जानकारी मिल चुकी थी। जयपुर के आसपास के दूदू, बगरू केलोग भी बेनीवाल के काफिले में जुड़ने का ऐलान कर चुके थे।