Income Tax Notice News : आप इनकम टैक्स पेयर हैं। आपको विभाग से किसी तरह का कोई नोटिस मिला है। घबराने की कोई जरूरत नहीं। नोटिस में दिए गए सभी सवालों का जवाब घर बैठे ही डिजिटल प्रोसेस से दे सकते हैं। आपने यदि इनकम टैक्स रिटर्न में कुछ गलत जानकारी दे भी दी तो डरें नहीं, आप चार साल में अपडेटेड इनकम टैक्स रिटर्न सबमिट करके फ्री हो सकते हैं। वैसे नोटिस सामान्यतया डेटा मिसमैच, स्क्रूटनी या रिटर्न फाइल न करने की स्थिति में भेजे जाते हैं.। नोटिस के हेडर में यह साफ लिखा होता है कि वह किस सेक्शन के तहत जारी हुआ है।
आमतौर पर सेक्शन 143(1) (इनकम में अंतर), 139(9) (डिफेक्टिव रिटर्न) या 148 (इनकम छुपाने से जुड़ा मामला) शामिल होते हैं. सेक्शन समझने से यह पता चलता है कि मामला सुधार का है या गहन जांच का। हर वैलिड इनकम टैक्स नोटिस पर डॉक्यूमेंट आइडेंटिफिकेशन नंबर (DIN) होना अनिवार्य है. टैक्सपेयर्स ई-फाइलिंग पोर्टल पर जाकर ‘Authenticate Notice/Order’ ऑप्शन के जरिए DIN चेक कर सकते हैं. अगर नोटिस में DIN नहीं है, तो वह कानूनी रूप से अमान्य माना जाएगा।
AIS और TIS से मिलान करें
ज्यादातर नोटिस AIS (Annual Information Statement) और TIS (Taxpayer Information Summary) से मिसमैच के कारण आते हैं.। पोर्टल पर लॉग-इन कर यह चेक करें कि बैंक, एम्प्लॉयर या दूसरे संस्थानों की तरफ से दी गई जानकारी आपकी रिटर्न से मेल खाती है या नहीं।
समय पर जवाब दें
नोटिस में दी गई ड्यू डेट का विशेष ध्यान रखने की जरूरत होती है। सामान्यतया यह 15 से 30 दिन होती है. इस दौरान समय पर जवाब न देने पर विभाग एकतरफा (Ex-parte) असेसमेंट कर सकता है, जिससे एक्स्ट्रा टैक्स और पेनल्टी लग सकती है।
ई-प्रोसीडिंग्स के जरिए जवाब दें
सैलरी स्लिप, फॉर्म-16, बैंक स्टेटमेंट और निवेश से जुड़े सभी डिजिटल प्रूफ तैयार रखें। ई-फाइलिंग पोर्टल के ‘Pending Actions’ सेक्शन में जाकर ई-प्रोसीडिंग्स के तहत जवाब सबमिट करें. PDF फॉर्मेट में डॉक्युमेंट्स अपलोड करें और फाइल साइज का ध्यान रखें.।नोटिस में उठाए गए हर सवाल का पॉइंट-टू-पॉइंट जवाब दें. जहां गलती है, उसे स्वीकार करें और जहां असहमति है, वहां ठोस प्रूफ के साथ कारण बताएं.
यह भी है ऑप्शन
अगर आपको लगे कि गलती आपकी ही है, तो सेक्शन 139(8A) के तहत अपडेटेड रिटर्न फाइल की जा सकती है. यह सुविधा संबंधित असेसमेंट ईयर के चार साल तक उपलब्ध है. इसके अलावा जवाब सबमिट करने के बाद आधार OTP या EVC से ई-वेरिफिकेशन जरूरी है. इसके बाद पोर्टल पर केस स्टेटस पर नजर रखें. उचित जवाब मिलने पर मामला ‘Closed’ दिखेगा।