Fathers Day 2026: हर बेटी के जीवन में एक ऐसा व्यक्तित्व होता है, जिसकी छाप उसके शब्दों, विचारों, निर्णयों और पूरे जीवन पर दिखाई देती है। मेरे लिए वह व्यक्तित्व मेरे पापा हैं। पितृ दिवस पर जब मैं अपने जीवन की यात्रा को पलटकर देखती हूँ, तो महसूस करती हूँ कि मेरे भीतर जो भी अच्छे गुण हैं, उनकी जड़ें मेरे पापा के संस्कारों में ही गहराई तक समाई हुई हैं। पापा हमेशा एक बात कहते हैं- “जीवन में कुछ भी करो, छोटा या बड़ा, लेकिन सही करो।”
शायद यही एक वाक्य मेरे जीवन का मूलमंत्र बन गया। उन्होंने कभी मुझे ऊँचे पद, बड़ी सफलता या नाम कमाने का पाठ नहीं पढ़ाया। उन्होंने केवल इतना सिखाया कि जो भी काम करो, पूरी ईमानदारी, निष्ठा और समर्पण के साथ करो। वे अक्सर कहते हैं- “बेटे सौ रुपये की नौकरी भी करो तो उसे पूरी ईमानदारी से करना। काम की कीमत उसके वेतन से नहीं, तुम्हारी निष्ठा से तय होती है।”
आज जब मैं ज्ञान विहार स्कूल में अपनी जिम्मेदारियाँ निभाती हूँ, संपर्क संस्थान में सामाजिक कार्य करती हूँ, राजस्थान लेखिका साहित्य संस्थान से जुड़ी हूँ या किसी भी मंच पर अपनी भूमिका निभाती हूँ, तो हर जगह पापा की यही सीख मेरे साथ चलती है। लोग अक्सर मेरी सक्रियता, मेरी प्रतिबद्धता और मेरे कार्य के प्रति समर्पण की चर्चा करते हैं, लेकिन मैं जानती हूँ कि यह सब मेरे पापा के दिए हुए संस्कारों का ही परिणाम है। पापा ने मुझे केवल पढ़ाया-लिखाया नहीं, बल्कि जीवन जीना सिखाया है। उन्होंने मुझे निडर बनना सिखाया। निर्भीक होकर अपनी बात रखना सिखाया। सत्य का साथ देना सिखाया। गलत के सामने झुकना नहीं सिखाया। और सबसे बड़ी बात, किसी भी परिस्थिति में अपने आत्मसम्मान से समझौता न करना सिखाया।
जब भी जीवन में कोई कठिन निर्णय सामने आता है, मुझे पापा की आवाज़ सुनाई देती है- “सच का रास्ता कठिन हो सकता है, लेकिन गलत रास्ता कभी मंजिल तक नहीं पहुँचाता।” उनकी यही शिक्षा मुझे हर बार सही निर्णय लेने का साहस देती है। मैंने उन्हें हमेशा स्पष्टवादी देखा है। जो बात सही लगी, उसके पक्ष में खड़े रहे और जो गलत लगी, उसका विरोध किया। शायद यही कारण है कि मैं भी आज अपनी बात स्पष्टता से कह पाती हूँ। मेरे व्यक्तित्व में यदि थोड़ी भी दृढ़ता है, तो वह पापा की देन है। यदि थोड़ा भी आत्मविश्वास है, तो वह पापा की देन है। यदि समाज और साहित्य के बीच सक्रिय रहकर कुछ अच्छा करने की इच्छा है, तो वह भी पापा की ही देन है। जीवन में कई लोग हमें सफलता का रास्ता दिखाते हैं, लेकिन चरित्र का निर्माण बहुत कम लोग कर पाते हैं। मेरे पापा ने मेरे चरित्र की नींव रखी है। आज मैं जो कुछ भी हूँ-
एक शिक्षिका, एक साहित्यकार, एक सामाजिक कार्यकर्ता-उसकी सबसे मजबूत बुनियाद मेरे पापा के संस्कार हैं। पापा मेरे लिए केवल पिता नहीं हैं, वे मेरे पहले शिक्षक, मेरे मार्गदर्शक, मेरे सबसे बड़े आलोचक और मेरे सबसे बड़े प्रेरणास्रोत हैं। ईश्वर से यही प्रार्थना है कि उनका स्नेह, उनका आशीर्वाद और उनकी सीख जीवन भर मेरे साथ बनी रहे। पापा, आपने मुझे उड़ना सिखाया, लेकिन अपने संस्कारों की डोर से हमेशा जोड़े रखा। आप मेरे जीवन का अभिमान हैं। आप मेरे व्यक्तित्व की जड़ हैं।और मैं आपकी बेटी होने पर स्वयं को सौभाग्यशाली मानती हूँ।
– रेनू शब्द मुखर